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शास्त्र विरुद्ध से नास्तिकता

भक्ति', बड़े होते हुए मैं कई बार इस शब्द से गुजरा. आम तौर पर इसे भगवान के प्रति निष्ठा के तौर पर देखा जाता है. लेकिन इसका इस्तेमाल देश के प्रति प्यार या किसी दूसरे के लिए समर्पण के तौर भी किया जाता है. मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं भगवान पर भरोसा करता हूं. इसलिए काफी लंबे समय तक मैं 'देव भक्ति' का सही मतलब नहीं समझ सका.
पूर्ण परमात्मा की भक्ति करने से सभी रोग बुराइयां अपने आप हो जाती हैं


वर्षों बाद मैंने महसूस किया कि हिंदू धर्म में भगवान के प्रति समर्पण व्यक्त करने के कई तरीके हैं. आप भगवान को इस ब्रह्मांड का एक सर्वेसर्वा मान सकते हैं. खुद को एक दास के तौर पर सोच सकते हैं. आप चाहें तो भगवान को अपना एक अच्छा दोस्त भी मान सकते हैं और उसके प्रति दोस्ती का भाव रख सकते हैं. इससे भी आगे आप भगवान को अपने बच्चे के तौर पर देख सकते हैं और उसके लिए एक मां जैसा स्नेह महसूस कर सकते हैं. आप चाहें तो भगवान को अपने प्रेमी या प्रेमिका के तौर पर भी देख सकते हैं. साहस के साथ एक और बात मैं कहना चाहता हूं पूर्ण परमात्मा की भक्ति करने से सभी रोग और बुराई अपने आपशूट जाती हैं।


पूर्ण परमात्मा की भक्ति करने के लिए शस्त्र ही प्रमाण है शास्त्रों में बताया है गीता जी अध्याय 8 श्लोक तीसरा में बताया है कि वह परम अक्षर भ्रम है उसकी भक्ति किसी तत्वदर्शी संत की शरण में जाने के पश्चात कपट छोड़कर सभी बुराइयां त्यागकर को भलीभांति दंडवत प्रणाम कर और फिर तेरे को वह तत्व ज्ञान का उपदेश करेंगे

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