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5 June 2020 kabir saheb parkar divas

#DeepKnowledge_Of_GodKabir
वास्तविक धर्म का ज्ञान
कबीर परमेश्वर जी ने सभी धर्मों के लोगों को संदेश दिया कि सब मानव एक परमात्मा की संतान हैं। अज्ञानता वश हम अलग-अलग जाति धर्मों में बंट गये।
जीव हमारी जाति है,मानव धर्म हमारा।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, आपस में सब भाई-भाई।
आर्य जैनी और विश्‍नोई, एक प्रभु के बच्चे सोई।।
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Sadhana chennal 7:30pm lll

#2DaysLeft_KabirPrakatDiwas

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धनतेरस की फायदे

धनतेरस मनाने से कोई आर्थिक लाभ नहीं होता है ब्राह्मणवाद और बनियों ने झूठा पाखंड रचा रखा है इससे न तो कोई फायदा है  और फायदा करने वाला वह तो पूर्ण परमात्मा ही होता है जो  जब चाहे  जिस को अमीर बनाने और और पूर्ण परमात्मा की भक्ति करने से धन और राम नाम से भी धनवान होते और जानकारी साधना टीवी शाम 30 साल 8:30 बजे तक 

5 जून 2020 कबीर प्रकट दिवस

#कबीरपरमेश्वर_सशरीर_सतलोक_गए कबीर, क्या काशी क्या ऊसर मगहर, राम हृदय बस मोरा। जो कासी तन तजै कबीरा, रामे कौन निहोरा।। मगहर में मरने वाला गधा बनता है इस भ्रम का खंडन करते हुए कबीर परमात्मा ने बताया कि जिसके हृदय में परमात्मा का वास हैं वह चाहे काशी में मरे या मगहर में उसकी मुक्ति निश्चित है। यदि काशी में तन छोड़ने से मुक्ति होती है तो भगवान को भजने की क्या आवश्यकता थी? 👇👇👇👇 Sadhana chennal 7:30pm llll

5 जून 2020 कबीर साहेब प्रकट दिवस

#GodKabir_Comes_In_4_Yugas 🎉सतयुग में सतसुकृत नाम से, त्रेतायुग में मुनिन्द्र नाम से, द्वापर युग में करूणामय नाम से तथा कलयुग में वास्तविक कविर्देव (कबीर प्रभु) नाम से प्रकट हुए हैं। 👇👇👇👇 अवश्य देखें साधना टीवी शाम 7:30 बजे संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन कबीर परमात्मा चारों युगों में आते हैं यजुर्वेद के अध्याय नं. 29 के श्लोक नं. 25 (संत रामपाल जी महाराज द्वारा भाषा-भाष्य):- जिस समय पूर्ण परमात्मा प्रकट होता है उस समय सर्व ऋषि व सन्त जन शास्त्र विधि त्याग कर मनमाना आचरण अर्थात् पूजा कर रहे होते हैं। तब अपने तत्वज्ञान का संदेशवाहक बन कर स्वयं ही कबीर प्रभु ही आता है। 👇👇👇👇 #GodKabir_Comes_In_4_Yugas 🎉कबीर परमेश्वर चारों युगों में अपने सत्य ज्ञान का प्रचार करने आते हैं। सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान। झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।। 🎉पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) वेदों के ज्ञान से भी पूर्व सतलोक में विद्यमान थे तथा अपना वास्तविक ज्ञान (तत्वज्ञान) देने के लिए चारों युगों में भी स्वयं प्रकट हुए हैं।