मत करो अपना घात आत्महत्या हैं महापाप👏
क्या आत्महत्या सारी मुसीबतों का स्थाई हल है...?
बिल्कुल नही :- आत्महत्या दुखों से मुक्ति नहीं बल्कि अपने परिवार पर दुखों का कहर थोपना वह अपनी आत्मा को परमात्मा का दोषी बनाना है आत्महत्या ईश्वर का दिया हुआ सुंदर शरीर का अपमान ही नहीं बल्कि एक सामाजिक अपराध है आत्महत्या वो त्रुटि हैं जिसका कोई प्रायश्चित नहीं है।
आत्महत्या के बाद स्थूल शरीर को तो आपने नष्ट कर दिया लेकिन सूक्ष्म शरीर आपके द्वारा किए हुए अपराध की सजा भोगता है सूक्ष्म शरीर को भयंकर कष्ट होता है।
गरुड़ पुराण के अनुसार आत्महत्या के बाद जीवात्मा को अनेक योनियों में कष्ट उठाने पड़ते हैं और जिस से भूत प्रेत की योनिया भोगनी पड़ती हैं और फिर पशु पक्षियों की योनियों में भुगतना पड़ता है और काल की तप्तशिला का असहनीय कष्ट भोगना पड़ता है।
आत्महत्या भी व्यक्ति के पूर्व जन्म के पाप कर्मों पर निर्धारित होती हैं इसलिए शास्त्र अनुकूल सत भक्ति से व्यक्ति के पुण्य कर्म बनने शुरू हो जाते हैं और पाप कर्म क्षीण हो जाते हैं जिससे उसको जीने की राह मिल जाती हैं और वह तत्वज्ञान से अपने नकारात्मक विचारों को बदलकर सकारात्मक रास्ता तय कर लेता है।
अतः पूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान के लिए संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान सुनकर उनसे नाम उपदेश लेकर मर्यादा में रहकर सत भक्ति करने से मनुष्य जन का कल्याण करावे।
क्या आत्महत्या सारी मुसीबतों का स्थाई हल है...?
बिल्कुल नही :- आत्महत्या दुखों से मुक्ति नहीं बल्कि अपने परिवार पर दुखों का कहर थोपना वह अपनी आत्मा को परमात्मा का दोषी बनाना है आत्महत्या ईश्वर का दिया हुआ सुंदर शरीर का अपमान ही नहीं बल्कि एक सामाजिक अपराध है आत्महत्या वो त्रुटि हैं जिसका कोई प्रायश्चित नहीं है।
आत्महत्या के बाद स्थूल शरीर को तो आपने नष्ट कर दिया लेकिन सूक्ष्म शरीर आपके द्वारा किए हुए अपराध की सजा भोगता है सूक्ष्म शरीर को भयंकर कष्ट होता है।
गरुड़ पुराण के अनुसार आत्महत्या के बाद जीवात्मा को अनेक योनियों में कष्ट उठाने पड़ते हैं और जिस से भूत प्रेत की योनिया भोगनी पड़ती हैं और फिर पशु पक्षियों की योनियों में भुगतना पड़ता है और काल की तप्तशिला का असहनीय कष्ट भोगना पड़ता है।
आत्महत्या भी व्यक्ति के पूर्व जन्म के पाप कर्मों पर निर्धारित होती हैं इसलिए शास्त्र अनुकूल सत भक्ति से व्यक्ति के पुण्य कर्म बनने शुरू हो जाते हैं और पाप कर्म क्षीण हो जाते हैं जिससे उसको जीने की राह मिल जाती हैं और वह तत्वज्ञान से अपने नकारात्मक विचारों को बदलकर सकारात्मक रास्ता तय कर लेता है।
अतः पूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान के लिए संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान सुनकर उनसे नाम उपदेश लेकर मर्यादा में रहकर सत भक्ति करने से मनुष्य जन का कल्याण करावे।


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