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Showing posts from June, 2020

आत्महत्या महापाप

मत करो अपना घात आत्महत्या हैं महापाप👏 क्या आत्महत्या सारी मुसीबतों का स्थाई हल है...? बिल्कुल नही :- आत्महत्या दुखों से मुक्ति नहीं बल्कि अपने परिवार पर दुखों का कहर थोपना वह अपनी आत्मा को परमात्मा का दोषी बनाना है आत्महत्या ईश्वर का दिया हुआ सुंदर शरीर का अपमान ही नहीं बल्कि एक सामाजिक अपराध है आत्महत्या वो त्रुटि हैं जिसका कोई प्रायश्चित नहीं है। आत्महत्या के बाद स्थूल शरीर को तो आपने नष्ट कर दिया लेकिन सूक्ष्म शरीर आपके द्वारा किए हुए अपराध की सजा भोगता है सूक्ष्म शरीर को भयंकर कष्ट होता है। गरुड़ पुराण के अनुसार आत्महत्या के बाद जीवात्मा को अनेक योनियों में कष्ट उठाने पड़ते हैं और जिस से भूत प्रेत की योनिया भोगनी पड़ती हैं और फिर पशु पक्षियों की योनियों में भुगतना पड़ता है और काल की तप्तशिला का असहनीय कष्ट भोगना पड़ता है। आत्महत्या भी व्यक्ति के पूर्व जन्म के पाप कर्मों पर निर्धारित होती हैं इसलिए शास्त्र अनुकूल सत भक्ति से व्यक्ति के पुण्य कर्म बनने शुरू हो जाते हैं और पाप कर्म क्षीण हो जाते हैं जिससे उसको जीने की राह मिल जाती हैं और वह तत्वज्ञान से अपने नकारात्मक व...

5 June kabir saheb parkar divas

#623rd_GodKabir_PrakatDiwas काशी में एक लहरतारा तालाब था। गंगा नदी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के लिए गए हुए थे। वहां नीरू - नीमा को कमल कद फूल पर शिशु रूप में कबीर परमात्मा मिले थे। कबीर प्रकट दिवस 2020

5 June 2020 Kabir saheb parkar divas

#5जून_महासत्संग_साधनाTVपर  हम सब जीवो को पार करने के लिए ही कबीर साहेब स्वयं ही  संत रामपाल जी महाराज के रूप में आए हुए हैं आप सत्संग जरूर सुने #5thJuneKabirPrakatDiwas

5 June 2020 kabir saheb parkar divas

#DeepKnowledge_Of_GodKabir वास्तविक धर्म का ज्ञान कबीर परमेश्वर जी ने सभी धर्मों के लोगों को संदेश दिया कि सब मानव एक परमात्मा की संतान हैं। अज्ञानता वश हम अलग-अलग जाति धर्मों में बंट गये। जीव हमारी जाति है,मानव धर्म हमारा। हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।। हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, आपस में सब भाई-भाई। आर्य जैनी और विश्‍नोई, एक प्रभु के बच्चे सोई।। 👇👇👇👇 Sadhana chennal 7:30pm lll #2DaysLeft_KabirPrakatDiwas

5 June kabir saheb parkar divas

#DeepKnowlegde_Of_GodKabir समाधान :- परमेश्वर कबीर जी ने बताया है कि :-यौन उत्पीड़न के प्रेरक :- फिल्में, जिनमें नकली, बनावटी कहानियाँ तथाअदाऐं दिखाई जाती हैं जिनको देखकर जवान बच्चे उसी की नकल करके बेशर्महोने लगते हैं। जैसी गतिविधि फिल्म में दिखाई जाती है, वैसी गतिविधि न घर में,न गली में, न सभ्य समाज में की जा सकती हैं। तो उनको देखने का उद्देश्य क्यारह जाता है? कुछ नहीं। केवल बहाना है मनोरंजन। वही मनोरंजन समाज नाशका मूल कारण है। मेरे (लेखक के) अनुयाई बिल्कुल भी फिल्म नहीं देखते।अश्लील रागनी, फिल्मी गाने, सांग (स्वांग) तथा अश्लील चर्चा जो निकम्मेयुवा करते हैं। उनकी संगत में अच्छे युवा भी प्रेरित होकर बकवाद करने लग जातेहैं। कबीर परमेश्वर जी ने कहा है कि :-कथा करो करतार की, सुनो कथा करतार।काम (ैमग) कथा सुनों नहीं, कह कबीर विचार।।भावार्थ :- कबीर परमेश्वर जी ने समझाया है कि या तो परमात्मा की महिमाका गुणगान (कथा) करो या कहीं परमात्मा की चर्चा (कथा) हो रही हो तो वहसुनो। काम यानि अश्लील चर्चा कभी न सुनना। कबीर जी ने यह विचार यानि मतबताया है। #2DaysLeft_KabirPrakatDiwas

5 June 2020 kabir saheb parkar divas

#DivinePlay_Of_GodKabir मीरा बाई को शरण में लेना मीरा बाई पहले श्री कृष्ण जी की पूजा करती थी। एक दिन संत रविदास जी तथा परमात्मा कबीर जी का सत्संग सुना तो पता चला कि श्री कृष्ण जी नाशवान हैं। समर्थ अविनाशी परमात्मा अन्य है। संत रविदास जी को गुरू बनाया। फिर अंत में कबीर जी को गुरू बनाया। तब मीरा बाई जी का सत्य भक्ति बीज का बोया गया। गरीब, मीरां बाई पद मिली, सतगुरु पीर कबीर। देह छतां ल्यौ लीन है, पाया नहीं शरीर।। संत गरीबदास जी को शरण में लेना  👇👇👇👇 Sadhana TV 7:30pm lll #3DaysLeft_KabirPrakatDiwas

5 June 2020 kabir saheb parkar divas

👇👇👇👇 *#Miracles_Of_GodKabir मृत लड़के कमाल को जीवित करना" शेखतकी का कहना था कि अगर कबीर अल्लाह है, तो किसी मुर्दे को जीवित कर दे तो अल्लाह मान लूंगा। सुबह एक 10-12 वर्ष की आयु के लड़के का शव पानी में तैरता हुआ आ रहा था। शेखतकी ने जंत्र-मंत्र से प्रयत्न किया लेकिन लड़का जीवित नहीं हुआ। तब कबीर साहेब ने कहा कि हे जीवात्मा जहाँ भी है, कबीर हुक्म से मुर्दे में प्रवेश कर और बाहर आ। इतना कहा ही था कि शव में कम्पन हुई तथा जीवित होकर बाहर आ गया। "भैंसे से वेद मन्त्र बुलवाना" एक समय तोताद्रि नामक स्थान पर सत्संग था। सत्संग के पश्चात भण्डारा शुरू हुआ। भंडारे में भोजन करने वाले व्यक्ति को वेद के चार मन्त्र बोलने पर प्रवेश मिल रहा था। कबीर साहेब की बारी आई तब थोड़ी सी दूरी पर घास चरते हुए भैंसे को हुर्रर हुर्रर करते हुए बुलाया। तब कबीर जी ने भैंसे की कमर पर थपकी लगाई और कहा कि भैंसे इन पंडितों को वेद के चार मन्त्र सुना दे। भैंसे ने छः मन्त्र सुना दिए। "जगन्नाथ के पांडे की कबीर जी द्वारा रक्षा" जगन्नाथ पुरी में एक रामसहाय पाण्डा खिचड़ी का प्रसाद उतार र...